विस्तृत उत्तर
हाँ, गरुड़ पुराण में स्पष्ट वर्णन है कि प्रेत-आत्मा अपने परिजनों के पास रहती है — विशेषकर मृत्यु के बाद के 13 दिनों में।
गरुड़ पुराण में वर्णन है — मृत्यु के बाद जीवात्मा 13 दिनों तक अपने परिजनों के बीच रहती है। वह अपने घर, अपने प्रियजनों को देखती है। परिजनों के रोने-बिलखने को देखकर प्रेत-आत्मा स्वयं भी रोती है परंतु कोई उसे देख-सुन नहीं सकता।
मोहग्रस्त आत्माएँ — जो आत्माएँ अपने परिवार, घर और संपत्ति से अत्यधिक मोहग्रस्त होती हैं, वे मृत्यु के बाद लंबे समय तक अपने पुराने घर और परिजनों के पास ही भटकती रहती हैं।
कठिनाई — प्रेत-आत्मा अपने परिजनों को पुकारती है परंतु वे सुन नहीं पाते। वह अपने मृत शरीर को देखती है, दाह-संस्कार को देखती है — यह उसके लिए अत्यंत कष्टकारी अनुभव होता है।
सलाह — जब प्रेत-आत्मा घर के पास भटकती है तो घर में झगड़े, बीमारी और अशांति हो सकती है। इसीलिए उचित संस्कार शीघ्र करने चाहिए।





