नहीं, गरुड़ पुराण के अनुसार सभी जीव समान अनुभव नहीं करते। पुण्यात्मा को देवदूत दिव्य विमान से ले जाते हैं, पापी को यमदूत कष्ट देते हैं। अनुभव पूर्णतः जीवन के कर्मों पर निर्भर है।
गरुड़ पुराण का यह सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है कि मृत्यु के बाद सभी जीवात्माएँ एक समान अनुभव नहीं करतीं।
उनका अनुभव उनके जीवनकाल के कर्मों, भक्ति और स्वभाव पर पूर्णतः निर्भर करता है।