सभी जीव वैतरणी पार कर सकते हैं परंतु कर्मों के अनुसार भिन्न अनुभव से। गौदान-दानी को गाय/नाव की सहायता मिलती है। पापी को नाक में कांटा फंसाकर खींचा जाता है और लंबे समय तक यातना भोगनी पड़ती है।
गरुड़ पुराण के अनुसार, वैतरणी नदी पार करने की क्षमता जीव के जीवनकाल के कर्मों और दान-पुण्य पर निर्भर करती है।