नहीं। पुण्यात्माएँ, भगवद्-भक्त और स्वाभाविक मृत्यु वाले प्रेत नहीं बनते। अकाल मृत्यु, मोह, अधूरे संस्कार और विशेष पापकर्म वाले ही प्रेत योनि में जाते हैं।
गरुड़ पुराण के अनुसार सभी मृत व्यक्ति प्रेत नहीं बनते। यह पूर्णतः जीव के कर्मों, मृत्यु की प्रकृति और संस्कारों पर निर्भर करता है।
पुण्यात्माओं के लिए — जिन्होंने जीवन में धर्म, भक्ति और सत्कर्मों का पालन किया हो, जिनकी मृत्यु स्वाभाविक और प्राकृतिक रूप से हुई हो — उन्हें प्रेत योनि में नहीं जाना पड़ता।