विस्तृत उत्तर
नहीं। गरुड़ पुराण के अनुसार सभी मृत व्यक्ति प्रेत नहीं बनते। यह पूर्णतः जीव के कर्मों, मृत्यु की प्रकृति और संस्कारों पर निर्भर करता है।
पुण्यात्माओं के लिए — जिन्होंने जीवन में धर्म, भक्ति और सत्कर्मों का पालन किया हो, जिनकी मृत्यु स्वाभाविक और प्राकृतिक रूप से हुई हो — उन्हें प्रेत योनि में नहीं जाना पड़ता। उनके लिए देवदूत दिव्य विमान लेकर आते हैं और वे सीधे सद्गति की ओर जाते हैं।
सामान्य मृत्यु में — 'कुछ पुण्य आत्माएँ मरने के बाद भूत या प्रेत योनि में न जाकर पुनः गर्भधारण कर लेती हैं।'
भगवद्-भक्त — जो जीवन भर ईश्वर की भक्ति में लीन रहे, उनकी आत्मा सीधे वैकुंठ या दिव्य लोक को जाती है — प्रेत योनि नहीं।
प्रेत योनि किसे मिलती है — अकाल मृत्यु वाले, अधूरे संस्कार वाले, मोहग्रस्त और विशेष पापी।
गरुड़ पुराण का संदेश — उचित जीवन, सत्कर्म और ईश्वर-भक्ति प्रेत योनि से बचाते हैं। मृत्यु के बाद परिजनों द्वारा किए गए उचित संस्कार भी इससे मुक्ति दिलाते हैं।





