नहीं, सभी पाप समान नहीं। गरुड़ पुराण में महापाप (ब्रह्महत्या, गोहत्या, सुरापान आदि), सामान्य पाप (झूठ, चोरी) और मानसिक पाप (बुरे विचार) — तीन स्तर हैं। प्रत्येक के लिए अलग दंड है।
गरुड़ पुराण में स्पष्ट रूप से पापों की विभिन्न श्रेणियाँ बताई गई हैं।
गरुड़ पुराण में पाप-वर्गीकरण — गरुड़ पुराण के चतुर्थ अध्याय 'नरक प्रदान करने वाले पाप कर्म' में भगवान विष्णु गरुड़ को विभिन्न पापों और उनके विभिन्न दंडों का वर्णन करते हैं।