यमलोक का विधान मुख्यतः मनुष्यों के लिए है क्योंकि केवल मनुष्य के पास विवेक से कर्म करने की शक्ति है। पशु-पक्षी भोग योनि में होते हैं और उनके कर्मों का वैसा न्याय नहीं होता जैसा मनुष्य का होता है।
गरुड़ पुराण और पुराणिक वर्णनों के अनुसार यमलोक मुख्यतः मनुष्यों के कर्मों का न्याय करने का स्थान है।
सभी प्राणियों का यमलोक जाना शास्त्रों में स्पष्ट रूप से वर्णित नहीं है।