लड्डू गोपाल को बालक मानकर सेवा करें। प्रातः पंचामृत स्नान, मौसमी वस्त्र, मोरपंख मुकुट, बाँसुरी, माखन-मिश्री-तुलसी का भोग, दिन में दो बार भोग, रात्रि में शयन सेवा। तुलसी अनिवार्य है।
लड्डू गोपाल भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की प्रतिमा हैं। इनकी पूजा में भक्त इन्हें साक्षात बालक की तरह सेवा करते हैं।
यह परंपरा वैष्णव भक्ति की उस धारा से जुड़ी है जहाँ भगवान के प्रति वात्सल्य भाव सर्वोपरि है।