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पूजा विधान⏱ 3 मिनट पठन

लड्डू गोपाल पूजा का विशेष विधान क्या है?

लड्डू गोपाल को बालक मानकर सेवा करें।

संक्षिप्त उत्तर

लड्डू गोपाल को बालक मानकर सेवा करें। प्रातः पंचामृत स्नान, मौसमी वस्त्र, मोरपंख मुकुट, बाँसुरी, माखन-मिश्री-तुलसी का भोग, दिन में दो बार भोग, रात्रि में शयन सेवा। तुलसी अनिवार्य है।

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विस्तृत उत्तर

लड्डू गोपाल भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की प्रतिमा हैं। इनकी पूजा में भक्त इन्हें साक्षात बालक की तरह सेवा करते हैं। यह परंपरा वैष्णव भक्ति की उस धारा से जुड़ी है जहाँ भगवान के प्रति वात्सल्य भाव सर्वोपरि है।

लड्डू गोपाल पूजा की विशेष विधि इस प्रकार है:

प्रातःकाल की सेवा — सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा घर साफ करें। लड्डू गोपाल को पालने में बिठाकर सबसे पहले उनकी सुबह की जागरण-सेवा करें — मानो छोटे बच्चे को जगा रहे हों।

स्नान — दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल मिलाकर पंचामृत तैयार करें। लड्डू गोपाल को इस पंचामृत से अभिषेक कराएँ। इसके बाद स्वच्छ जल से पोंछकर साफ मुलायम कपड़े से सुखाएँ। मालिश के लिए उबटन या चंदन का उपयोग किया जाता है।

श्रृंगार — स्नान के बाद भगवान को सुंदर वस्त्र पहनाएँ। मौसम के अनुसार ग्रीष्म में हल्के और शीत में गर्म वस्त्र। सिर पर मोरपंख वाला मुकुट, कानों में कुंडल, गले में वैजयंती माला और हाथों में छोटी बाँसुरी अर्पित करें। माथे पर चंदन तिलक लगाएँ।

भोग — लड्डू गोपाल को दिन में कम से कम दो बार भोग लगाना चाहिए — सुबह और शाम। भोग में माखन-मिश्री उनकी सर्वप्रिय चीज मानी जाती है। इसके साथ पंजीरी, फल, दूध, मेवे और तुलसी दल अवश्य रखें। तुलसी पत्र के बिना भोग अधूरा माना जाता है।

नित्य पूजा — धूप-दीप जलाएँ, आरती करें और श्रीकृष्ण के मंत्रों का जप करें। 'ॐ श्री कृष्णाय नमः' अथवा 'हरे कृष्ण हरे कृष्ण' का जप करते हुए पूजा करें।

शयन सेवा — रात्रि में लड्डू गोपाल को छोटे पालने में सुलाएँ। उन्हें मुलायम बिछौने में लिटाएँ और रात्रि में दीपक जलता रहे।

विशेष ध्यान देने योग्य बातें — लड्डू गोपाल को एकाकी नहीं छोड़ना चाहिए। घर में अशुद्धता हो (मृत्यु या सूतक) तो उस अवधि में पूजा रोकना उचित होता है। तामसिक भोजन (लहसुन, प्याज, माँस) उनके भोग में कभी न रखें।

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