ऋग्वेद के 'श्री सूक्त' का प्रथम मंत्र ('ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं...') माता लक्ष्मी के स्वर्णिम स्वरूप का आवाहन है। श्री यंत्र पर इसका नियमित पाठ दरिद्रता को पूर्णतः नष्ट कर देता है।
ऋग्वेद में वर्णित 'श्री सूक्त' माता महालक्ष्मी को प्रसन्न करने और स्थिर धन-धान्य की प्राप्ति का सबसे प्रामाणिक और प्राचीन वैदिक स्तोत्र है।
इसमें 15 ऋचाएं (मंत्र) हैं जो लक्ष्मी के स्वर्णिम और अत्यंत तेजोमय स्वरूप का वर्णन करती हैं।