महामृत्युंजय = 33 अक्षर → पुरश्चरण = 33 लाख। रुद्राक्ष माला अनिवार्य। सोमवार, महाशिवरात्रि, ग्रहण काल विशेष। हवन: तिल-जौ-दूर्वा-घी। रोगी की ओर से परिवार भी कर सकता है। ध्यान: त्र्यम्बक शिव — तीन नेत्र
महामृत्युंजय मंत्र — मृत्यु और रोग पर विजय का महामंत्र — की सिद्धि: महामृत्युंजय मंत्र (यजुर्वेद 3।