गरुड़ पुराण के अनुसार महापापी की पहचान उसके शरीर के चिह्नों से होती है — ब्रह्महत्यारा क्षय रोगी, गोघाती कुबड़ा, मद्यपान करने वाले के दाँत काले, गुरु-अपमानकर्ता मिरगी का रोगी और परस्त्रीगामी नपुंसक हो
गरुड़ पुराण के पाँचवें अध्याय में भगवान विष्णु विस्तार से बताते हैं कि नरकभोग के बाद जब महापापी जीव मनुष्य योनि में जन्म लेता है, तो उसके पापों के चिह्न उसके शरीर पर स्पष्ट दिखाई देते हैं।