महाशिवरात्रि में रात को चार प्रहर की पूजा करें — प्रथम प्रहर दूध, द्वितीय दही, तृतीय घी, चतुर्थ शहद से अभिषेक। प्रत्येक प्रहर बेलपत्र, 'ॐ नमः शिवाय' जप और आरती। पूरी रात जागरण। अगले दिन प्रातः पारण।
महाशिवरात्रि पूजा की विधि शिव पुराण की कोटिरुद्र संहिता में विस्तार से वर्णित है: महाशिवरात्रि कब: फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी।
शिव पुराण के अनुसार इस रात शिव और शक्ति का विवाह हुआ था — यही कारण इसे 'महाशिवरात्रि' कहा जाता है।