महिषासुर-वध में दुर्गा ने त्रिशूल, सुदर्शन चक्र, वज्र, शंख, घंटा, शक्ति और फरसा — समस्त देव-प्रदत्त अस्त्रों का प्रयोग किया। अंतिम वध त्रिशूल से छाती पर प्रहार से हुआ।
दुर्गा सप्तशती में महिषासुर-वध का विस्तृत वर्णन है। नौ दिनों तक चले इस महायुद्ध में देवी ने अनेक अस्त्रों का प्रयोग किया।
युद्ध का विवरण — महिषासुर एक मायावी असुर था जो बार-बार रूप बदलता रहा — कभी भैंसा, कभी सिंह, कभी मनुष्य, कभी हाथी।