विस्तृत उत्तर
दुर्गा सप्तशती में महिषासुर-वध का विस्तृत वर्णन है। नौ दिनों तक चले इस महायुद्ध में देवी ने अनेक अस्त्रों का प्रयोग किया।
युद्ध का विवरण — महिषासुर एक मायावी असुर था जो बार-बार रूप बदलता रहा — कभी भैंसा, कभी सिंह, कभी मनुष्य, कभी हाथी। हर रूप में देवी ने उचित अस्त्र से उसका सामना किया।
प्रयुक्त अस्त्र — वज्र (इंद्र से प्राप्त) से असुरों की सेना पर प्रहार किया। सुदर्शन चक्र (विष्णु से) से असुर-दल का विनाश हुआ। शंख (वरुण से) की ध्वनि से असुर भयभीत हुए। घंटा (इंद्र के ऐरावत से) की ध्वनि ने असुरों को मूर्छित किया। शक्ति (अग्नि से) का प्रयोग सेना पर हुआ। फरसा (विश्वकर्मा से) से भी युद्ध किया।
अंतिम वध — महिषासुर के अंतिम रूप में देवी ने शराब पीकर उस पर चढ़ाई की। उन्होंने अपने पैर से उसे दबाया और अपने त्रिशूल से उसकी छाती पर प्रहार किया। इससे महिषासुर का वध हुआ और देवी 'महिषासुरमर्दिनी' कहलाईं।





