यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते श्लोक का अर्थ
#नारी सम्मान#मनुस्मृति#श्लोक
मनुस्मृति 3.56 — जहां नारियां सम्मानित होती हैं, वहां देवता निवास करते हैं। जहां सम्मान नहीं, सब कर्म निष्फल। 3.57 — जहां स्त्रियां दुःखी, वह कुल नष्ट; जहां प्रसन्न, वह कुल सदा बढ़ता है। 'पूजन' = सम्मान, अधिकार, गरिमा, प्रेम।
स्रोत प्रश्न: यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते श्लोक का अर्थ →सनातन धर्म के सभी प्रमुख शब्दों के अर्थ।
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