84 लाख योनियां क्या हैं और मनुष्य कैसे बनता है?
की चेकलिस्ट
पद्म पुराण के अनुसार: जलचर 9L + पेड़-पौधे 20L + कृमि 11L + पक्षी 10L + पशु 30L + मानव 4L = 84 लाख। शुभ कर्मों से मनुष्य जन्म मिलता है। मनुष्य में विवेक और मोक्ष की क्षमता — 'बड़े भाग मानुष तन पावा' (रामचरितमानस)।
- 1जलचर (जलज) — 9 लाख (पानी में रहने वाले जीव)
- 2स्थावर (पेड़-पौधे) — 20 लाख
- 3कृमि (कीड़े-मकौड़े) — 11 लाख
- 4पक्षी — 10 लाख
- 5पशु (थलचर) — 30 लाख
- 6मानव — 4 लाख
- 7कुल = 84 लाख
- 8कर्मानुसार 84 लाख योनियाँ पूरी करने और शुभ कर्म करने पर मनुष्य जन्म मिलता है।
- 94 लाख बार आत्मा मनुष्य योनि में जन्म लेती है, फिर पितृ/देव योनि प्राप्त होती है।
- 10मनुष्य योनि में नीच कर्म करने पर पुनः निम्न योनियों में गिरना पड़ता है — इसे 'दुर्गति' कहा गया है।
- 11विवेक — केवल मनुष्य में विवेक (सही-गलत का ज्ञान) है।
- 12कर्म स्वातंत्र्य — केवल मनुष्य ही अपने कर्मों से भाग्य बदल सकता है।
- 13मोक्ष का द्वार — मनुष्य योनि ही मोक्ष प्राप्ति का एकमात्र मार्ग है।
- 14रामचरितमानस: *'बड़े भाग मानुष तन पावा'* — बड़े भाग्य से मनुष्य शरीर मिला है।
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