अग्निहोत्र करने का सही समय क्या है
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अग्निहोत्र दो समय: (1) प्रातः — सूर्योदय के ठीक समय ('सूर्याय स्वाहा') (2) सायं — सूर्यास्त के ठीक समय ('अग्नये स्वाहा')। संधिकाल में। गोबर कण्डे/समिधा + गाय का घी + चावल। श्रौत विधान में एक ऋत्विज् आवश्यक। गृह्य/दैनिक हवन गृहस्थ स्वयं कर सकता है। शतपथ ब्राह्मण में नित्यकर्म।
- 1मंत्र: 'सूर्याय स्वाहा, सूर्याय इदं न मम। प्रजापतये स्वाहा, प्रजापतये इदं न मम।'
- 2मंत्र: 'अग्नये स्वाहा, अग्नये इदं न मम। प्रजापतये स्वाहा, प्रजापतये इदं न मम।'
- 3गोबर के कण्डों या आम/पलाश की समिधाओं से अग्नि प्रज्वलित करें।
- 4उल्टे पिरामिड आकार के ताँबे या मिट्टी के कुण्ड में।
- 5गाय के घी और चावल (अक्षत) से आहुति दें।
- 6मंत्रोच्चार के साथ 'स्वाहा' बोलकर आहुति।
- 7श्रौत: अत्यन्त विस्तृत, तीन अग्नियों (गार्हपत्य, आहवनीय, दक्षिणाग्नि) में। एक ऋत्विज् आवश्यक।
- 8गृह्य/दैनिक हवन: सरल रूप, एक हवनकुण्ड, गृहस्थ स्वयं कर सकता है।
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हवन एवं यज्ञ
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