अष्टविनायक गणेश दर्शन का सही क्रम क्या है?
की चेकलिस्ट
क्रम: १.मोरेश्वर (मोरगाँव) → २.सिद्धिविनायक (सिद्धटेक) → ३.बल्लालेश्वर (पाली) → ४.वरदविनायक (महड) → ५.चिंतामणि (थेऊर) → ६.गिरिजात्मज (लेण्याद्री) → ७.विघ्नहर (ओझर) → ८.महागणपति (रांजणगाँव) → पुनः मोरेश्वर।
- 1मोरेश्वर (मोरगाँव) — यह यात्रा का प्रारंभिक और अंतिम दोनों मंदिर है। यहाँ से यात्रा शुरू होती है और समापन भी यहीं पर होता है। गणेश जी ने यहाँ त्रिपुरासुर का वध किया था।
- 2सिद्धिविनायक (सिद्धटेक) — भीमा नदी के तट पर स्थित। गणपति की सूंड यहाँ दाहिनी ओर है — जो दुर्लभ है। भगवान विष्णु ने यहाँ तपस्या करके सिद्धि प्राप्त की।
- 3बल्लालेश्वर (पाली) — गणेश जी का यह एकमात्र स्वरूप है जो किसी भक्त के नाम पर है।
- 4वरदविनायक (महड) — यह वरदान देने वाले गणपति हैं। यहाँ अखंड दीप जलता रहता है।
- 5चिंतामणि (थेऊर) — भक्तों की चिंता हरने वाले गणेश। माधवराव पेशवा इनके प्रबल भक्त थे।
- 6गिरिजात्मज (लेण्याद्री) — पहाड़ी गुफाओं में स्थित एकमात्र गुफा-मंदिर। यहाँ माता पार्वती ने गणेश को जन्म दिया।
- 7विघ्नहर (ओझर) — विघ्नासुर को पराजित करके यहाँ विराजित हुए। अष्टविनायकों में सबसे सम्पन्न मंदिर माना जाता है।
- 8महागणपति (रांजणगाँव) — दस हाथों वाले विशाल स्वरूप। भगवान शिव ने त्रिपुरासुर से युद्ध से पहले यहाँ गणेश की आराधना की।
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तीर्थ यात्रा
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