भैरव रूप में शिव की पूजा विधि क्या है?
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भैरव = शिव का उग्र 5वां अवतार, काशी के कोतवाल। कालाष्टमी (कृष्ण अष्टमी) मुख्य दिन। रात्रि पूजा। 'ॐ कालभैरवाय नमः' 108 बार। काले तिल, सरसों तेल, गेंदा। काले कुत्ते को भोजन। काशी में विश्वनाथ से पहले भैरव दर्शन अनिवार्य।
- 1प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- 2भैरव प्रतिमा/चित्र के सामने दीपक (सरसों तेल का) जलाएं।
- 3काले तिल, उड़द, सरसों का तेल अर्पित करें।
- 4नारियल, नींबू अर्पित करें।
- 5गेंदे के फूल विशेष रूप से अर्पित करें।
- 6'ॐ कालभैरवाय नमः' या 'ॐ बटुकभैरवाय नमः' मंत्र 108 बार जपें।
- 7काल भैरव अष्टक (शंकराचार्य रचित — 'काशिकापुराधिनाथकालभैरवं भजे') का पाठ।
- 8भैरव चालीसा या भैरव स्तोत्र का पाठ।
- 9काले कुत्ते को भोजन: भैरव का वाहन श्वान (कुत्ता) है — काले कुत्ते को भोजन कराना अत्यंत शुभ।
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श्रेणी
शिव रूप
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