भूमि पूजन में गणेश, भूमि देवी (पृथ्वी माता), वास्तु पुरुष, अष्ट दिक्पाल (इंद्र, अग्नि, यम, निऋति, वरुण, वायु, कुबेर, ईशान), नवग्रह, नाग देवता और विश्वकर्मा की पूजा करें। ईशान कोण से आरंभ करें।
- 1श्री गणेश — सर्वप्रथम विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा। किसी भी शुभ कार्य का आरंभ गणपति पूजन से होता है।
- 2भूमि देवी (पृथ्वी माता) — भूमि की अधिष्ठात्री देवी। 'ॐ भूम्यै नमः' मंत्र से पूजन। अथर्ववेद में पृथ्वी सूक्त (12.1) भूमि देवी की स्तुति है।
- 3वास्तु पुरुष — वास्तु के अधिष्ठाता देवता। 'ॐ वास्तोष्पते प्रतिजानीह्यस्मान्...' (ऋग्वेद 7.54.1) मंत्र से पूजन।
- 4अष्ट दिक्पाल — आठ दिशाओं के स्वामी देवता:
- 5नवग्रह — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु — इन नवग्रहों की स्थापना और पूजन।
- 6पंचलोकपाल — ब्रह्मा, विष्णु, शिव, सूर्य, गणेश — कुछ परंपराओं में इनका पूजन होता है।
- 7नाग देवता (सर्प) — भूमि के भीतर निवास करने वाले नाग देवता को शांत करने हेतु। अनंत नाग या वासुकि की पूजा।
- 8विश्वकर्मा — देवशिल्पी और वास्तु के आदि गुरु। निर्माण कार्य के संरक्षक देवता।
- 9शुभ मुहूर्त में ईशान कोण से आरंभ।
- 10भूमि पर गोबर का लेपन और गंगाजल छिड़काव।
- 11गणपति पूजन → कलश स्थापना → नवग्रह पूजन → वास्तु पुरुष पूजन → दिक्पाल पूजन → भूमि देवी पूजन।
- 12हवन — वास्तु शांति मंत्रों से आहुतियां।
- 13भूमि खनन — ईशान कोण में पहली कुदाल/खनन।
- 14पूर्णाहुति और प्रसाद वितरण।