ब्रह्म पुराण में श्राद्ध की क्या परिभाषा है?
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ब्रह्म पुराण: 'उचित काल, उचित पात्र, पवित्र स्थान, शास्त्रानुमोदित विधि से, पितरों को लक्ष्य कर, श्रद्धापूर्वक श्रेष्ठ ब्राह्मणों को जो दिया जाए = श्राद्ध।' काल+पात्र+स्थान+विधि+लक्ष्य+श्रद्धा का संगम।
- 1शास्त्र-निर्धारित समय (जैसे पितृ पक्ष, मध्याह्न, कुतुप मुहूर्त)।
- 2सुपात्र = श्रेष्ठ ब्राह्मण।
- 3शुद्ध और पवित्र स्थान।
- 4वेदों, पुराणों, स्मृतियों द्वारा निर्धारित विधि।
- 5अपने पूर्वजों के निमित्त किया गया।
- 6श्रेष्ठ ब्राह्मणों को श्रद्धा के साथ दिया गया।
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श्राद्ध परिचय
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