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चेकलिस्ट

दाह संस्कार की विधि क्या है?

की चेकलिस्ट

दाह विधि: चिता निर्माण → शव स्थापन (उत्तर-शिर) → पिण्डदान → छिद्र-घट जल-परिक्रमा (3 बार) → घड़ा फोड़ें → मुखाग्नि (स्वयं प्रज्वलित) → कपाल क्रिया → अस्थि संचय (3रा दिन) → गंगा विसर्जन। पूर्ण दाह निषिद्ध। 13 दिन कर्ता का तप।

  1. 1श्मशान में शुद्ध स्थान चुनें।
  2. 2भूमि पर पवित्र जल छिड़कें, गोबर से लीपें।
  3. 3चिता वेदी — साढ़े 4 हाथ लम्बी, साढ़े 3 हाथ चौड़ी।
  4. 4लकड़ियाँ (चन्दन, आम, पीपल आदि शुभ वृक्षों की) व्यवस्थित रखें।
  5. 5शव को चिता पर उत्तर दिशा में सिर करके रखें।
  6. 6नग्न शव का दाह निषिद्ध है — वस्त्र अवश्य दें।
  7. 7घी, कपूर, चन्दन, अगर-तगर, कर्पूर आदि सुगंधित पदार्थ रखें।
  8. 8चिता पर शव रखने के बाद पिण्डदान दें। कुल पाँच पिण्ड विभिन्न स्थानों पर दिए जाते हैं।
  9. 9मुखाग्नि देने वाला छेद वाले मिट्टी के घड़े में जल लेकर चिता की तीन अपसव्य (वामावर्त) परिक्रमा करे।
  10. 10घड़े से जल टपकता रहे।
  11. 11तीन परिक्रमा पूर्ण होने पर बिना पीछे देखे घड़ा पीछे की ओर गिराकर फोड़ दें।
  12. 12ज्येष्ठ पुत्र (या कर्ता) मुख की ओर से अग्नि प्रज्वलित करे।
  13. 13अग्नि स्वयं प्रज्वलित करनी चाहिए (चाण्डालाग्नि निषिद्ध)।
  14. 14मंत्रोच्चार के साथ अग्नि दें।
  15. 15जब चिता पूर्ण प्रज्वलित हो जाए और खोपड़ी (कपाल) न फटे तो बाँस या लकड़ी से कपाल फोड़ा जाता है। इसे 'कपाल क्रिया' कहते हैं।
  16. 16पूर्ण दाह निषिद्ध है — कुछ अवशेष रहना चाहिए (आदित्यपुराण)।
  17. 17अस्थि संचय तीसरे दिन (कुछ परम्पराओं में चौथे दिन)।
  18. 18अस्थि विसर्जन पवित्र नदी (गंगा) में।
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