विस्तृत उत्तर
दाह संस्कार अंत्येष्टि का मुख्य प्रकार है जिसमें मृत शरीर को अग्नि में समर्पित किया जाता है।
दाह संस्कार की विस्तृत विधि
1चिता निर्माण
- ▸श्मशान में शुद्ध स्थान चुनें।
- ▸भूमि पर पवित्र जल छिड़कें, गोबर से लीपें।
- ▸चिता वेदी — साढ़े 4 हाथ लम्बी, साढ़े 3 हाथ चौड़ी।
- ▸लकड़ियाँ (चन्दन, आम, पीपल आदि शुभ वृक्षों की) व्यवस्थित रखें।
2शव स्थापन
- ▸शव को चिता पर उत्तर दिशा में सिर करके रखें।
- ▸नग्न शव का दाह निषिद्ध है — वस्त्र अवश्य दें।
- ▸घी, कपूर, चन्दन, अगर-तगर, कर्पूर आदि सुगंधित पदार्थ रखें।
3पिण्डदान
- ▸चिता पर शव रखने के बाद पिण्डदान दें। कुल पाँच पिण्ड विभिन्न स्थानों पर दिए जाते हैं।
4परिक्रमा (छिद्र-घट विधि)
- ▸मुखाग्नि देने वाला छेद वाले मिट्टी के घड़े में जल लेकर चिता की तीन अपसव्य (वामावर्त) परिक्रमा करे।
- ▸घड़े से जल टपकता रहे।
- ▸तीन परिक्रमा पूर्ण होने पर बिना पीछे देखे घड़ा पीछे की ओर गिराकर फोड़ दें।
5मुखाग्नि
- ▸ज्येष्ठ पुत्र (या कर्ता) मुख की ओर से अग्नि प्रज्वलित करे।
- ▸अग्नि स्वयं प्रज्वलित करनी चाहिए (चाण्डालाग्नि निषिद्ध)।
- ▸मंत्रोच्चार के साथ अग्नि दें।
6कपाल क्रिया
- ▸जब चिता पूर्ण प्रज्वलित हो जाए और खोपड़ी (कपाल) न फटे तो बाँस या लकड़ी से कपाल फोड़ा जाता है। इसे 'कपाल क्रिया' कहते हैं।
7दाह के बाद
- ▸पूर्ण दाह निषिद्ध है — कुछ अवशेष रहना चाहिए (आदित्यपुराण)।
- ▸अस्थि संचय तीसरे दिन (कुछ परम्पराओं में चौथे दिन)।
- ▸अस्थि विसर्जन पवित्र नदी (गंगा) में।
अग्नि का नियम
दाह अग्नि घर से ले जाने का विधान है (स्मार्त परम्परा)। किसी अन्य से अग्नि लेना (चाण्डालाग्नि) शास्त्रानुमोदित नहीं है।
विशेष: मुखाग्नि देने वाले को 13 दिनों तक विशेष नियमों का कठोर पालन करना होता है — एक समय भोजन, भूमि शयन, ब्रह्मचर्य आदि।





