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दक्षिणामूर्ति शिव की उपासना का क्या महत्व है?

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दक्षिणामूर्ति = शिव का परम गुरु स्वरूप। दक्षिणामूर्ति उपनिषद् (यजुर्वेद): 24 अक्षर मंत्र। शंकराचार्य स्तोत्र: अद्वैत सार, 'मोक्ष शास्त्र'। मौन गुरु — वृद्ध शिष्यों के संशय छिन्न। गुरु न मिले तो इन्हें गुरु मानें। गुरुवार/गुरु पूर्णिमा विशेष। विद्यार्थियों के लिए बुद्धि वृद्धि।

  1. 1गुरु प्राप्ति: शास्त्रों के अनुसार जिसे सद्गुरु न मिले, वह दक्षिणामूर्ति को गुरु मानकर साधना कर सकता है — योग्य होने पर मानव गुरु की प्राप्ति होगी।
  2. 2विद्या/बुद्धि वृद्धि: विद्यार्थियों के लिए विशेष — दक्षिणामूर्ति मंत्र जप से पढ़ाई-लिखाई में लाभ।
  3. 3आत्मज्ञान/मोक्ष: अद्वैत वेदांत का सर्वोच्च ज्ञान।
  4. 4गुरुवार (बृहस्पतिवार): दक्षिणामूर्ति पूजा का विशेष दिन।
  5. 5गुरु पूर्णिमा: दक्षिणामूर्ति वंदना का सर्वोत्तम अवसर।
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