दौहित्र श्राद्ध किसे कहते हैं?
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दौहित्र श्राद्ध = मातामह श्राद्ध का दूसरा नाम। 'दौहित्र' = पुत्री का पुत्र (नाती)। नाती द्वारा अपने नाना-नानी का श्राद्ध। मामा जीवित न हो या दौहित्र स्वयं चाहे — दोनों परिस्थितियों में पूर्ण शास्त्रीय अधिकार से कर सकता है। प्रतिपदा तिथि सर्वोत्कृष्ट।
- 1नाती द्वारा अपने नाना-नानी (मातामह-मातामही) का श्राद्ध।
- 2अर्थात् पुत्री के पुत्र द्वारा माता के माता-पिता का श्राद्ध।
- 3यदि नाना-नानी के कुल में श्राद्ध करने वाला कोई पुत्र (अर्थात् कर्ता का मामा) जीवित न हो।
- 4अथवा दौहित्र अपने मातृकुल के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना चाहता हो।
- 5वह प्रतिपदा तिथि को अपने नाना-नानी का श्राद्ध पूर्ण शास्त्रीय अधिकार के साथ कर सकता है।
- 6प्रतिपदा = दौहित्र श्राद्ध के लिए सर्वोत्कृष्ट और शास्त्र-निर्धारित तिथि।
- 7अन्य कोई तिथि इस श्राद्ध के लिए इतनी उपयुक्त नहीं।
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मातामह श्राद्ध
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