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चेकलिस्ट

देव लोक, ब्रह्म लोक, विष्णु लोक में क्या अंतर?

की चेकलिस्ट

देवलोक (स्वर्ग) = इंद्र, अस्थायी (पुण्य क्षीण→वापसी)। ब्रह्मलोक (सत्यलोक) = ब्रह्मा, दीर्घकालिक (प्रलय तक)। विष्णुलोक (वैकुंठ) = विष्णु, शाश्वत (मोक्ष — वापसी नहीं)। गीता (15.6): 'यद्गत्वा न निवर्तन्ते' = वैकुंठ।

  1. 1स्थान: 14 लोकों में तीसरा ऊर्ध्व लोक (भूलोक→भुवर्लोक→स्वर्लोक)।
  2. 2शासक: इंद्र (देवराज)।
  3. 3निवासी: देवता (इंद्र, वरुण, वायु, अग्नि आदि), अप्सराएँ, गंधर्व, किन्नर।
  4. 4विशेषता: पुण्य कर्मों का फल भोगने का स्थान। अस्थायी — पुण्य क्षीण होने पर पुनः पृथ्वी पर जन्म।
  5. 5गीता (9.21): *'क्षीणे पुण्ये मर्त्यलोकं विशन्ति'* — पुण्य क्षीण होने पर मृत्युलोक (पृथ्वी) लौटते हैं।
  6. 6स्थान: 14 लोकों में सबसे ऊपर, सातवाँ ऊर्ध्व लोक।
  7. 7शासक: ब्रह्मा जी।
  8. 8निवासी: ब्रह्मा, सरस्वती, महान ऋषि, सृष्टि के आरंभिक प्राणी।
  9. 9विशेषता: यहाँ मृत्यु, बुढ़ापा, दुख नहीं। प्रलय में भी अप्रभावित (अकृतक लोक)। ब्रह्मा की आयु (100 ब्रह्मवर्ष) पूर्ण होने पर ही यह लोक समाप्त होता है।
  10. 10स्थान: 14 लोकों से परे — त्रिगुणातीत, शाश्वत, अविनाशी।
  11. 11शासक: भगवान विष्णु (नारायण)।
  12. 12निवासी: विष्णु, लक्ष्मी, मुक्त आत्माएँ (मोक्ष प्राप्त)।
  13. 13विशेषता: शाश्वत — कभी नष्ट नहीं, प्रलय में भी अप्रभावित। यहाँ से कोई लौटकर नहीं आता — यही मोक्ष है। गीता (15.6): *'यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम'*।
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