धर्म का सही अर्थ क्या है हिंदू दर्शन में?
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धर्म = 'जो धारण करे' (धृ धातु)। वैशेषिक: जिससे लौकिक उन्नति और मोक्ष दोनों सिद्ध हों। मनुस्मृति: 10 लक्षण — धैर्य, क्षमा, संयम, शौच, सत्य आदि। 'धर्म' = Religion नहीं, कर्तव्य + नैतिकता + प्राकृतिक व्यवस्था।
- 1सामान्य/सार्वभौमिक धर्म — सत्य, अहिंसा, दया, दान, शौच (स्वच्छता) — सभी मनुष्यों के लिए।
- 2वर्ण धर्म — ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र का अपना-अपना कर्तव्य।
- 3आश्रम धर्म — ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, संन्यास — जीवन के चार चरणों का धर्म।
- 4स्वधर्म — व्यक्ति का अपना कर्तव्य। गीता (3.35): *'स्वधर्मे निधनं श्रेयः'*
- 5राज धर्म — शासक का कर्तव्य।
- 6युग धर्म — युग के अनुसार धर्म।
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