बटुक भैरव का ध्यान श्लोक का क्या अर्थ है?
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ध्यान श्लोक का अर्थ: स्फटिक जैसे शुद्ध, घुंघराले केश, नव-मणि आभूषण, किंकिणी-नूपुर सुसज्जित, दीप्तिमान, प्रसन्न त्रिनेत्रधारी, शूल-दण्ड धारी बाल भैरव की वंदना।
- 1जिनका स्वरूप स्फटिक के समान शुद्ध है
- 2जिनका मुख घुंघराले केशों से शोभायमान है
- 3वे नव-मणियों से जड़ित दिव्य आभूषणों और घुँघरू (किंकिणी-नूपुर) से सुसज्जित हैं
- 4उनका आकार दीप्तिमान है, मुख निर्मल और वे अत्यंत प्रसन्नचित्त त्रिनेत्रधारी हैं
- 5वे अपने कर-कमलों में निरंतर शूल (त्रिशूल) और दण्ड धारण किए हुए हैं
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न्यास और ध्यान विधि
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