ध्यान करने से आध्यात्मिक विकास कैसे होता है?
की चेकलिस्ट
ध्यान से आध्यात्मिक विकास: मांडूक्योपनिषद — जाग्रत → स्वप्न → सुषुप्ति → तुरीय (ब्रह्म-साक्षात्कार)। गीता (13.24): ध्यान से आत्म-दर्शन। योग वशिष्ठ: 7 ज्ञान-भूमिकाएँ। भागवत: शुद्ध चित्त में भगवद्-साक्षात्कार।
- 1जाग्रत — स्थूल जगत की अनुभूति
- 2स्वप्न — सूक्ष्म जगत की अनुभूति
- 3सुषुप्ति — प्राज्ञ स्थिति
- 4तुरीय — ध्यान की गहनतम अवस्था = ब्रह्म-साक्षात्कार
- 5शुभेच्छा, 2. विचारणा, 3. तनुमानसा, 4. सत्त्वापत्ति, 5. असंसक्ति, 6. पदार्थाभावना, 7. तुरीयगा — ध्यान इन सभी चरणों को क्रमशः पार करवाता है।
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