ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
चेकलिस्ट

ध्यान के दौरान शरीर को स्थिर क्यों रखना चाहिए?

की चेकलिस्ट

शरीर स्थिर रखने से प्राण स्थिर होता है और प्राण स्थिर होने से मन स्थिर होता है। गीता (6/13-14) — शरीर, सिर, गर्दन अचल रखें। योगसूत्र (2/47-48) — आसन सिद्ध होने पर द्वंद्व नहीं सताते। गहरे ध्यान में शरीर-बोध क्षीण होकर केवल शुद्ध चेतना शेष रहती है।

  1. 1शरीर हिलेगा → प्राण-वायु विक्षुब्ध होगी → मन भटकेगा
  2. 2शरीर स्थिर होगा → प्राण स्थिर होगा → मन स्थिर होगा
  3. 3आसन सिद्ध होने पर प्रयास ढीला हो जाता है और अनंत में समापत्ति होती है।
  4. 4तब सर्दी-गर्मी, सुख-दुःख जैसे द्वंद्व नहीं सताते।
  5. 5शरीर, सिर और गर्दन को सीधा और अचल रखें — इधर-उधर न देखें।
  6. 6खुजली आए — उसे 'देखें', खुजलाएं नहीं — यह धैर्य-अभ्यास है
  7. 7थकान हो — शरीर को शिथिल करें, हिलाएं नहीं
  8. 8शरीर स्थिर करने का अभ्यास ही मन की स्थिरता सिखाता है
सम्पूर्ण उत्तर
विस्तृत प्रश्न पृष्ठ देखें

मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।

श्रेणी
ध्यान साधना

इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।