दुर्गा पूजा का महत्व क्या है?
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दुर्गा पूजा त्रिदेवों की संयुक्त शक्ति का उत्सव है — महिषासुर वध का स्मरण। आध्यात्मिक रूप से यह तमस-रजस-अहंकार का नाश और आंतरिक शक्ति की जागृति है। सप्तशती में कहा गया — शत्रु भय, रोग, दरिद्रता नाश और मोक्ष इसके फल हैं।
- 1महिषासुर वध: जब महिषासुर के अत्याचार से देवता भी परेशान हो गए, तब त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की संयुक्त शक्ति से दुर्गा प्रकट हुईं और महिषासुर का वध किया — तभी से दुर्गा पूजा की परंपरा है।
- 2रामायण में: देवी भागवत के अनुसार श्री राम ने लंका पर विजय से पूर्व शरद नवरात्रि में दुर्गा पूजा की थी — इसी से 'अकाल बोधन' की परंपरा बंगाल में है।
- 3दुर्गा सप्तशती का वचन: 'या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता' — देवी सभी प्राणियों में शक्ति रूप में विद्यमान हैं।
- 4तमस (आलस्य), रजस (विकार) और अहंकार (महिषासुर) का नाश
- 5सात्विक गुणों का उदय
- 6आंतरिक शक्ति की जागृति
- 7स्त्री शक्ति का सम्मान
- 8समाज में एकता और उत्सव का भाव
- 9पर्यावरण जागरूकता (मिट्टी की प्रतिमा, जल विसर्जन)
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देवी महात्म्य
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