दुर्गा पूजा में सिंदूर का क्या विशेष महत्व है?
की चेकलिस्ट
सिंदूर = सुहाग + शक्ति। देवी = शिव अर्धांगिनी। बंगाली 'सिंदूर खेला': विजयादशमी पर देवी को सिंदूर → महिलाएं एक-दूसरे को → दांपत्य सुख कामना। तांत्रिक: मूलाधार चक्र प्रतीक। नियम: शुद्ध सिंदूर, अनामिका से। प्रसाद सिंदूर मांग में = शुभ।
- 1विवाहित महिलाएं देवी प्रतिमा को सिंदूर लगाती हैं।
- 2फिर एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं।
- 3यह मां दुर्गा की विदाई और सुहाग की कामना का प्रतीक है।
- 4इससे दांपत्य जीवन सुखमय और दीर्घ होता है।
- 5देवी की मांग में सिंदूर भरना = उनको सुहागिन रूप में पूजना।
- 6सिंदूर + कुमकुम = शक्ति तिलक — ललाट पर लगाना शुभ।
- 7नवरात्रि, दशहरा, शुक्रवार पर विशेष।
- 8शुद्ध सिंदूर (बिना रासायनिक मिलावट) प्रयोग करें।
- 9अनामिका अंगुली से लगाएं।
- 10प्रसाद रूप में प्राप्त सिंदूर अपनी मांग में लगाना शुभ (विवाहित महिलाएं)।
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दुर्गा पूजा
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