विस्तृत उत्तर
दुर्गा पूजा में सिंदूर का अत्यंत विशेष महत्व है, विशेषकर बंगाली परंपरा में:
1सुहाग (सौभाग्य) का प्रतीक
सिंदूर = विवाहित स्त्री का सुहाग चिह्न। दुर्गा माता = शिव की अर्धांगिनी, सुहागिन देवी। सिंदूर अर्पण = सुहाग रक्षा और सौभाग्य की कामना।
2शक्ति और ऊर्जा
सिंदूर का लाल रंग = शक्ति, ऊर्जा, अग्नि। देवी दुर्गा शक्ति स्वरूपा — सिंदूर उनकी शक्ति का प्रतीक।
3सिंदूर खेला (बंगाली परंपरा)
बंगाल में दुर्गा पूजा के अंतिम दिन (विजयादशमी) 'सिंदूर खेला' की अनूठी परंपरा है:
- ▸विवाहित महिलाएं देवी प्रतिमा को सिंदूर लगाती हैं।
- ▸फिर एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं।
- ▸यह मां दुर्गा की विदाई और सुहाग की कामना का प्रतीक है।
- ▸इससे दांपत्य जीवन सुखमय और दीर्घ होता है।
4देवी पूजा में सिंदूर अर्पण
- ▸देवी की मांग में सिंदूर भरना = उनको सुहागिन रूप में पूजना।
- ▸सिंदूर + कुमकुम = शक्ति तिलक — ललाट पर लगाना शुभ।
- ▸नवरात्रि, दशहरा, शुक्रवार पर विशेष।
5तांत्रिक महत्व
सिंदूर = मूलाधार चक्र (लाल रंग) का प्रतीक। देवी पूजा में सिंदूर अर्पण कुण्डलिनी शक्ति के जागरण से भी जुड़ा।
सिंदूर अर्पण के नियम
- ▸शुद्ध सिंदूर (बिना रासायनिक मिलावट) प्रयोग करें।
- ▸अनामिका अंगुली से लगाएं।
- ▸प्रसाद रूप में प्राप्त सिंदूर अपनी मांग में लगाना शुभ (विवाहित महिलाएं)।





