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दुर्गा पूजा📜 धर्मशास्त्र, वास्तु शास्त्र, पूजा विधि परंपरा2 मिनट पठन

दुर्गा मां की मूर्ति स्थापना की विधि और दिशा क्या होनी चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

दिशा: पूर्व/उत्तर (ईशान कोण सर्वोत्तम)। विधि: गंगाजल शुद्धि → लाल कपड़ा चौकी → कलश → शुभ मुहूर्त में मूर्ति → प्राण प्रतिष्ठा → षोडशोपचार → सप्तशती/चालीसा → आरती। नियम: ऊंचे स्थान, शयनकक्ष से दूर, प्रतिदिन पूजा अनिवार्य।

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विस्तृत उत्तर

दुर्गा मां की मूर्ति स्थापना घर में या पंडाल में विशेष विधि-विधान से करनी चाहिए:

दिशा

  • पूर्व या उत्तर दिशा में मूर्ति स्थापित करें — भक्त का मुख पश्चिम या दक्षिण की ओर हो।
  • ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) सर्वोत्तम — वास्तु शास्त्र में यह दिशा देवस्थान के लिए श्रेष्ठ।
  • देवी का मुख पश्चिम या दक्षिण दिशा की ओर न हो (कुछ परंपराओं में)।

स्थापना विधि

  1. 1स्थान शुद्धि: गंगाजल छिड़ककर स्थान पवित्र करें।
  2. 2चौकी/वेदी: लकड़ी की चौकी या ऊंचे स्थान पर लाल कपड़ा बिछाएं।
  3. 3कलश स्थापना: मूर्ति के दाहिनी ओर कलश स्थापित करें (जल, आम पत्ते, नारियल)।
  4. 4मूर्ति स्थापना: शुभ मुहूर्त में मूर्ति स्थापित करें। 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' मंत्र जपें।
  5. 5प्राण प्रतिष्ठा: मूर्ति में देवी का आह्वान करें — 'ॐ प्राण प्रतिष्ठा...' मंत्र।
  6. 6षोडशोपचार पूजा: स्नान, वस्त्र, चंदन, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि 16 उपचार।
  7. 7दुर्गा सप्तशती/चालीसा पाठ।
  8. 8आरती।

घर में स्थायी स्थापना के नियम

  • मूर्ति ऊंचे स्थान पर हो — भूमि पर सीधे न रखें।
  • शयनकक्ष, रसोई, शौचालय के निकट न हो।
  • प्रतिदिन पूजा अनिवार्य — बिना पूजा मूर्ति रखना दोषकारक।
  • मूर्ति के सामने पैर करके न सोएं।
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शास्त्रीय स्रोत
धर्मशास्त्र, वास्तु शास्त्र, पूजा विधि परंपरा
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