विस्तृत उत्तर
दुर्गा मां की मूर्ति स्थापना घर में या पंडाल में विशेष विधि-विधान से करनी चाहिए:
दिशा
- ▸पूर्व या उत्तर दिशा में मूर्ति स्थापित करें — भक्त का मुख पश्चिम या दक्षिण की ओर हो।
- ▸ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) सर्वोत्तम — वास्तु शास्त्र में यह दिशा देवस्थान के लिए श्रेष्ठ।
- ▸देवी का मुख पश्चिम या दक्षिण दिशा की ओर न हो (कुछ परंपराओं में)।
स्थापना विधि
- 1स्थान शुद्धि: गंगाजल छिड़ककर स्थान पवित्र करें।
- 2चौकी/वेदी: लकड़ी की चौकी या ऊंचे स्थान पर लाल कपड़ा बिछाएं।
- 3कलश स्थापना: मूर्ति के दाहिनी ओर कलश स्थापित करें (जल, आम पत्ते, नारियल)।
- 4मूर्ति स्थापना: शुभ मुहूर्त में मूर्ति स्थापित करें। 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' मंत्र जपें।
- 5प्राण प्रतिष्ठा: मूर्ति में देवी का आह्वान करें — 'ॐ प्राण प्रतिष्ठा...' मंत्र।
- 6षोडशोपचार पूजा: स्नान, वस्त्र, चंदन, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य आदि 16 उपचार।
- 7दुर्गा सप्तशती/चालीसा पाठ।
- 8आरती।
घर में स्थायी स्थापना के नियम
- ▸मूर्ति ऊंचे स्थान पर हो — भूमि पर सीधे न रखें।
- ▸शयनकक्ष, रसोई, शौचालय के निकट न हो।
- ▸प्रतिदिन पूजा अनिवार्य — बिना पूजा मूर्ति रखना दोषकारक।
- ▸मूर्ति के सामने पैर करके न सोएं।





