दुर्गा पूजा में विजयादशमी पर अपराजिता पूजा क्या है
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अपराजिता पूजा: विजयदशमी अपराह्न में। अपराजिता = अपराजित देवी (दुर्गा रूप)। ईशान कोण में अष्टदल कमल → अपराजिता पुष्प (नीले) + शमी पत्र → 'ॐ अपराजितायै नमः'। राम ने लंका विजय पूर्व की। बंगाल: दुर्गा विसर्जन से पूर्व। विजय और सफलता हेतु।
- 1ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) दिशा में स्वच्छ स्थान पर अष्टदल कमल (8 पंखुड़ियों वाला कमल) या रंगोली बनाएँ।
- 2उस पर देवी अपराजिता की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें।
- 3अपराजिता पुष्प (नीले रंग के फूल — Clitoria ternatea) अर्पित करें।
- 4'ॐ अपराजितायै नमः' मंत्र से पूजन।
- 5धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित।
- 6शमी पत्र (शमी वृक्ष के पत्ते) भी अर्पित।
- 7विजय प्रार्थना: 'हे देवी अपराजिता, मुझे सर्वत्र विजय प्रदान करें।'
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