दुर्गा सप्तशती का रहस्य क्या है?
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सप्तशती के रहस्य: कीलक रहस्य (पाठ से पहले विकीलन अनिवार्य); तीन असुर — मन के शत्रुओं के प्रतीक (मधु-कैटभ=अज्ञान, महिषासुर=काम, शुंभ-निशुंभ=अहंकार); 'या देवी सर्वभूतेषु...' — देवी सर्वव्यापी शक्ति का दर्शन। नवार्ण में तीन देवियों के तीन बीज।
- 1मधु-कैटभ = अहंकार (यानी मन की मोह और अज्ञान)
- 2महिषासुर = पशु-वृत्ति (महिष = भैंस; अज्ञान और काम)
- 3शुंभ-निशुंभ = अभिमान और आत्ममोह
- 4रक्तबीज = विचारों की अनंत शाखाएं (एक से अनेक)
- 5चंड-मुंड = राग-द्वेष
- 6यह सर्वव्यापी देवी का दर्शन है — वह चेतना, शक्ति, बुद्धि, निद्रा, क्षुधा, तृष्णा — सभी रूपों में है।
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