गर्भाधान संस्कार कब और कैसे करें
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गर्भाधान = प्रथम संस्कार (16 में से)। कब: विवाह उपरान्त ऋतुकाल में, शुभ मुहूर्त। विधि: स्नान → गणपति पूजन → हवन → विष्णु/प्रजापति आह्वान → 'विष्णुर्योनिं कल्पयतु...' मंत्र। श्रेष्ठ सन्तान प्राप्ति हेतु ईश्वर से प्रार्थना। गृह्यसूत्र, मनुस्मृति में विधान।
- 1पति-पत्नी स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनें।
- 2गणेश पूजन और कलश स्थापना।
- 3हवन (अग्निहोत्र) — विशिष्ट मंत्रों से आहुतियाँ।
- 4पत्नी के गर्भ में श्रेष्ठ सन्तान की स्थापना हेतु प्रार्थना।
- 5विष्णु, प्रजापति, सिनीवाली, सरस्वती आदि देवताओं का आह्वान।
- 6पत्नी का स्पर्श करते हुए विशिष्ट मंत्र पाठ।
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