गीता में कृष्ण ने मन को वश में करना कैसे बताया
की चेकलिस्ट
गीता 6.35 — अभ्यास + वैराग्य से मन वश होता है। अभ्यास = बार-बार मन को विषयों से हटाकर ध्येय पर लाना (6.26)। वैराग्य = विषय भोगों से विरक्ति। सहायक: ध्यान, इंद्रिय निग्रह (कछुआ उदाहरण), सात्विक आहार, ईश्वर शरणागति।
- 1अभ्यास (Practice):
- 2वैराग्य (Detachment):
- 3ध्यान (6.10-15) — एकांत में, स्थिर आसन पर, नासिकाग्र दृष्टि, मन को शांत करो।
- 4इंद्रिय निग्रह (2.58-61) — कछुआ जैसे अंगों को समेटो — इंद्रियों को विषयों से वापस खींचो।
- 5समत्व (2.48) — सुख-दुख, लाभ-हानि में समान रहो।
- 6ईश्वर शरणागति (18.66) — मन भटके तो ईश्वर को समर्पित करो।
- 7सात्विक आहार (6.17) — 'युक्ताहारविहारस्य' — संतुलित आहार, विहार, निद्रा मन को शांत रखते हैं।
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