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गीता में ध्यान का महत्व क्या है?

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गीता अध्याय 6 (ध्यानयोग) के अनुसार नित्य ध्यान से परम शांति और निर्वाण मिलता है (6/15)। चंचल मन को बार-बार आत्मा में वापस लाना ही ध्यान का अभ्यास है। ध्यान का प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता।

  1. 1जो योगी इस प्रकार अपने मन को नियत करके नित्य ध्यान करता है, वह परम शांति और निर्वाण को प्राप्त करता है।
  2. 2यह चंचल और अस्थिर मन जहाँ-जहाँ भटके, वहाँ-वहाँ से रोककर आत्मा में ही वापस लाओ।
  3. 3यदि मन को स्थिर नहीं कर सकते, तो अभ्यास-योग से मुझे पाने की इच्छा करो।
  4. 4चित्त की एकाग्रता
  5. 5इंद्रियों पर नियंत्रण
  6. 6स्थितप्रज्ञता (समभाव)
  7. 7परम शांति और निर्वाण
  8. 8ईश्वर-साक्षात्कार
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