घर के मुख्य द्वार पर स्वस्तिक लगाने का क्या लाभ है
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मुख्य द्वार पर स्वस्तिक लगाने से शुभ ऊर्जा का प्रवेश, विघ्न निवारण, लक्ष्मी आगमन और दृष्टि दोष से रक्षा होती है। कुमकुम/हल्दी से या तांबे का स्वस्तिक द्वार के दोनों ओर लगाएं। यह गणेश जी और कल्याण का प्रतीक है।
- 1चार वेदों का प्रतीक — स्वस्तिक की चार भुजाएं चारों वेदों का प्रतिनिधित्व करती हैं — ऐसी एक व्याख्या है।
- 2चार पुरुषार्थ — धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष का प्रतीक।
- 3चार दिशाओं की रक्षा — चारों दिशाओं से शुभ ऊर्जा का आगमन।
- 4गणेश जी का प्रतीक — कई परंपराओं में स्वस्तिक को गणेश जी का प्रतीकात्मक रूप माना जाता है।
- 5शुभ ऊर्जा का प्रवेश — स्वस्तिक घर में सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और नकारात्मक ऊर्जा को रोकता है।
- 6विघ्न निवारण — गणपति स्वरूप होने से विघ्नों का नाश होता है।
- 7लक्ष्मी आगमन — स्वस्तिक को लक्ष्मी जी का भी प्रतीक माना जाता है; यह धन-समृद्धि को आकर्षित करता है।
- 8दृष्टि दोष निवारण — बुरी नज़र और दृष्टि दोष से रक्षा करता है।
- 9वास्तु दोष शमन — मुख्य द्वार के वास्तु दोष को कम करने में सहायक।
- 10सामग्री — कुमकुम (रोली), हल्दी या सिंदूर से बनाएं। स्थायी के लिए तांबे या चांदी का स्वस्तिक लगाएं।
- 11स्थान — मुख्य द्वार के दोनों ओर या ऊपर (चौखट पर) लगाएं।
- 12समय — दीपावली, गृह प्रवेश, नवरात्रि या किसी भी शुभ अवसर पर।
- 13दिशा — स्वस्तिक सीधा (दक्षिणावर्त/clockwise) होना चाहिए।
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श्रेणी
वास्तु शास्त्र
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