घर के मंदिर में मूर्ति का आकार कितना होना चाहिए?
की चेकलिस्ट
9 अंगुल (6-9 इंच): शास्त्रीय अधिकतम। छोटा मंदिर: 3-6 इंच। शिवलिंग: अंगूठे के बराबर (1-2 इंच)। ऊँचाई: हृदय स्तर। 24 इंच से बड़ी घर में वर्जित। बैठी/आशीर्वाद मुद्रा। खंडित/नटराज न रखें। कारण: बड़ी मूर्ति = जटिल पूजा नियम।
- 1छोटा गृह मंदिर: 3 से 6 इंच की मूर्तियाँ — सर्वोत्तम
- 2मध्यम/बड़ा पूजा कक्ष: 9 से 12 इंच — स्वीकार्य (कुछ परम्पराओं में 18 इंच तक)
- 3अधिकतम सीमा: 24 इंच से बड़ी मूर्ति घर में कदापि नहीं — बड़ी मूर्तियाँ केवल सार्वजनिक मंदिरों के लिए
- 4मूर्ति हृदय (Heart Level) की ऊँचाई पर रखें
- 5बैठकर पूजा करें तो बैठने पर हृदय स्तर
- 6खड़े होकर पूजा करें तो खड़े होने पर हृदय स्तर
- 7मूर्ति इतनी ऊँची न हो कि ऊपर देखना पड़े, न इतनी नीची कि नीचे झुकना पड़े
- 8मूर्ति बैठी मुद्रा या आशीर्वाद मुद्रा में हो — उग्र/क्रोधित मुद्रा न हो
- 9खंडित, दरार वाली, या चटकी हुई मूर्ति न रखें
- 10मूर्ति को दीवार से सटाकर न रखें — कुछ दूरी रखें
- 11पीतल, ताँबा, चाँदी, सोना, संगमरमर, अष्टधातु — उत्तम धातुएँ
- 12मिट्टी की मूर्ति स्थायी पूजा के लिए अनुशंसित नहीं (विसर्जन योग्य)
- 13नटराज (तांडव मुद्रा) शिव की मूर्ति घर में न रखें — कलह का कारण
- 14घर में अत्यधिक मूर्तियाँ न रखें — सबकी विधिवत पूजा कठिन
- 15इष्ट देव/देवी की मूर्ति प्रधान रखें
- 16कुछ विद्वान 1-3 मूर्तियाँ ही अनुशंसित करते हैं
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गृह मंदिर
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