घर के मंदिर में शिवलिंग रखने के नियम क्या हैं?
की चेकलिस्ट
शिवलिंग नियम: अंगूठे जितना (1-2 इंच)। पारद/स्फटिक/नर्मदेश्वर = श्रेष्ठ। जलाधारी मुख उत्तर। नित्य जलाभिषेक अनिवार्य — एक दिन न छूटे। तुलसी/कुंकुम/केतकी वर्जित। बिल्वपत्र अर्पित। दक्षिण मुख कर उत्तर से जल। यदि नित्य पूजा सम्भव नहीं — शिवलिंग न रखें।
- 1घर में अंगूठे के बराबर या उससे छोटा शिवलिंग ही रखें (1-2 इंच)
- 2बड़ा शिवलिंग = अधिक ऊर्जा = गृहस्थ वातावरण के लिए अनुकूल नहीं
- 3बड़े शिवलिंग की नित्य विस्तृत पूजा अनिवार्य — जो घर में सम्भव नहीं
- 4पारद (Mercury) शिवलिंग — सर्वश्रेष्ठ (अत्यन्त शुभ)
- 5स्फटिक (Crystal) — अत्यन्त शुभ
- 6नर्मदेश्वर (नर्मदा नदी से प्राप्त बाणलिंग) — स्वयम्भू, अत्यन्त पवित्र
- 7काले पत्थर, संगमरमर, पीतल — शुभ
- 8शिवलिंग को जलाधारी (अभिषेक जल निकासी पात्र) के साथ रखें
- 9जलाधारी का मुख उत्तर दिशा की ओर हो
- 10जलाधारी के बिना शिवलिंग रखना कुछ परम्पराओं में अशुभ
- 11शिवलिंग के सामने छोटा नंदी (बैल) रखना शुभ परंतु अनिवार्य नहीं
- 12नंदी का मुख शिवलिंग की ओर हो
- 13शिवलिंग उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में रखें
- 14पूजा करते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा में
- 15शिवलिंग स्थापित करने के बाद नित्य जलाभिषेक अनिवार्य
- 16एक दिन भी पूजा न छूटे — यह सबसे महत्वपूर्ण नियम
- 17यदि नित्य पूजा सम्भव नहीं, तो शिवलिंग न रखें — शालग्राम या मूर्ति रखें
- 18जल दक्षिण मुख करके, उत्तर दिशा से गिराएँ
- 19बिल्वपत्र, धतूरा, आक के फूल अर्पित करें
- 20तुलसी शिवलिंग पर वर्जित (शिवपुराण)
- 21कुंकुम/सिंदूर शिवलिंग पर न लगाएँ (कुछ परम्पराओं में अपवाद)
- 22'ॐ नमः शिवाय' मंत्र जप अनिवार्य
- 23शिवलिंग को छूकर सूँघें नहीं
- 24शिवलिंग के ऊपर से हाथ न ले जाएँ
- 25अभिषेक जल (चरणामृत) पीने योग्य — व्यर्थ न बहाएँ
- 26शिवलिंग पर केतकी (केवड़ा) पुष्प वर्जित
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