ग्रहण काल में पूजा और जप कैसे करें?
की चेकलिस्ट
ग्रहण काल: स्नान → जप (सर्वोत्तम कर्म, करोड़गुना फल)। सूर्य ग्रहण: सूर्य मंत्र/गायत्री। चन्द्र ग्रहण: चन्द्र मंत्र/महामृत्युंजय। इष्ट मंत्र जप। मोक्ष पर: पुनः स्नान → दान → पूजा। भोजन में तुलसी डालें। सोना वर्जित।
- 1स्नान: ग्रहण स्पर्श (आरम्भ) होते ही स्नान करें।
- 2जप (सर्वश्रेष्ठ कर्म): ग्रहण काल में मंत्र जप सर्वोत्तम कर्म है। इस समय का जप लाखों गुना फल देता है।
- 3कौन सा मंत्र जपें:
- 4मूर्ति पूजा: कुछ परम्पराओं में ग्रहण काल में मूर्ति पूजा वर्जित मानी जाती है — केवल मानसिक पूजा और जप करें। किन्तु अन्य परम्पराओं में पूजा शुभ मानी गई है।
- 5ग्रहण मोक्ष (समाप्ति) पर: ग्रहण समाप्त होने पर पुनः स्नान → दान → पूजा → भोजन।
- 6तुलसी पत्र: ग्रहण से पूर्व भोजन पदार्थों में तुलसी पत्र डाल दें — भोजन अशुद्ध नहीं होता।
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