हनुमान जी ने लंका क्यों जलाई — आध्यात्मिक अर्थ?
की चेकलिस्ट
लंका=अहंकार(सोने का वैभव)। जलाना=अहंकार दहन। पूँछ=इंद्रियाँ। ज्ञान अग्नि=अज्ञान जलाती(गीता 4.37)। एक भक्त=पूरा साम्राज्य। भक्ति शक्ति=असीम।
- 1लंका = अहंकार। सोने की लंका = भौतिक वैभव+अहंकार। जलाना = अहंकार दहन। जब भक्ति (हनुमान) आती = अहंकार (लंका) जलता।
- 2पूँछ = इंद्रियाँ। रावण ने पूँछ पकड़ी = इंद्रियों पर नियंत्रण का प्रयास। पर भक्त की इंद्रियाँ = भगवान के अधीन = अग्नि भी न जलाए।
- 3अग्नि = ज्ञान। ज्ञान अग्नि = अज्ञान (लंका) जलाती। गीता: *'ज्ञानाग्निः सर्वकर्माणि भस्मसात्कुरुते'* (4.37)।
- 4संदेश: एक भक्त = पूरा साम्राज्य जला सकता। भक्ति शक्ति = असीम।
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