हरिशयनी एकादशी पर विष्णु पूजा कैसे करें?
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हरिशयनी एकादशी: आषाढ़ शुक्ल एकादशी। विष्णु योगनिद्रा आरम्भ, चातुर्मास प्रारम्भ (4 माह शुभ कार्य वर्जित)। विधि: विष्णु शयन सज्जा → षोडशोपचार → 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' 1008 जप → चातुर्मास संकल्प → दान। प्रबोधिनी तक विष्णु सोते हैं।
- 1प्रातः स्नान-संकल्प: 'हरिशयनी एकादशी व्रतं करिष्ये, चातुर्मास व्रतमारभे।'
- 2विष्णु शयन सज्जा: भगवान विष्णु की प्रतिमा/शालिग्राम को शय्या (छोटा पलंग/आसन) पर शयन मुद्रा में रखें। शेषनाग पर शयन का दृश्य सजाएँ।
- 3षोडशोपचार पूजन: पंचामृत अभिषेक, पीले वस्त्र, तुलसी, पीले पुष्प, चन्दन, नैवेद्य (खीर, फल)।
- 4मंत्र जप: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' — 1008 बार। 'सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जगत् सुप्तं भवेदिदम्। विबुद्धे त्वयि बुध्येत जगत् सर्वं चराचरम्।'
- 5विष्णु सहस्रनाम/श्री सूक्त पाठ।
- 6चातुर्मास संकल्प: इस दिन चातुर्मास व्रत का संकल्प लें — शाक व्रत, दधि व्रत, क्षीर व्रत या अन्य नियम।
- 7दान: पीले वस्त्र, फल, अन्न, दक्षिणा।
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