जगन्नाथ मंदिर में भोग प्रसाद बनाने की विशेष विधि क्या है?
की चेकलिस्ट
जगन्नाथ रसोई: 752 चूल्हे, 500 रसोइये। विशेषता: 7 मिट्टी के हांडे एक पर एक — ऊपर वाला पहले पकता है। केवल लकड़ी ईंधन। 56 भोग विशेष अवसरों पर। शाकाहारी, प्याज-लहसुन वर्जित। महाप्रसाद = सर्वोच्च पवित्र — जाति-भेद रहित भोजन। प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता।
- 1मिट्टी के बर्तनों में ही भोजन पकता है — धातु के बर्तन प्रतिबंधित
- 2एक के ऊपर एक 7 मिट्टी के हांडे (बर्तन) रखकर पकाया जाता है
- 3आश्चर्यजनक बात: सबसे ऊपर का बर्तन पहले पकता है, फिर क्रमशः नीचे का
- 4ईंधन: केवल लकड़ी (गैस/बिजली नहीं)
- 5छप्पन भोग (56 भोग): विशेष अवसरों पर 56 प्रकार के व्यंजन
- 6दैनिक भोग: सामान्य दिनों में भी अनेक व्यंजन — चावल, दाल, सब्जी, खीर, मिठाई
- 7कोठ भोग: सूखा प्रसाद — लड्डू, खाजा आदि
- 8केवल शाकाहारी सामग्री
- 9प्याज-लहसुन वर्जित
- 10घी, दूध, चावल प्रमुख
- 11चावल विशेष किस्म का — 'उखुड़ा' (उबला चावल)
- 12जगन्नाथ का प्रसाद 'महाप्रसाद' कहलाता है — सर्वोच्च पवित्र
- 13स्कन्दपुराण: 'जगन्नाथ का महाप्रसाद खाने से जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति'
- 14यहाँ जाति-भेद नहीं — सभी वर्ण एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं
- 15प्रसाद को 'आनन्द बाजार' में बेचा जाता है — यह मंदिर का प्रसाद बाजार
- 16कहा जाता है कि जितने भी लोग आएँ, प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता और न कभी बचता
- 17मंदिर के ध्वज की दिशा हवा के विपरीत लहराती दिखती है
- 18समुद्र की हवा दिन में मंदिर की ओर (सामान्य से विपरीत)
- 19गोपाल बल्लव भोग (प्रातःकाल)
- 20शक्ल भोग (मध्याह्न)
- 21धूप (दोपहर)
- 22सन्ध्या धूप (सायंकाल)
- 23बड़शिंगार (रात्रि)
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