विस्तृत उत्तर
जगन्नाथ पुरी मंदिर का भोग प्रसाद (महाप्रसाद) विश्व में अद्वितीय है। यह विश्व की सबसे बड़ी मंदिर रसोई है जहाँ प्रतिदिन हजारों लोगों के लिए प्रसाद बनता है।
रसोई की विशेषताएँ
1विशाल रसोई
मंदिर की रसोई में 752 चूल्हे हैं और प्रतिदिन लगभग 500 रसोइये (सूपकार) भोग तैयार करते हैं। प्रतिदिन 10,000 से 1,00,000 भक्तों के लिए प्रसाद बनता है।
2पकाने की अद्भुत विधि
- ▸मिट्टी के बर्तनों में ही भोजन पकता है — धातु के बर्तन प्रतिबंधित
- ▸एक के ऊपर एक 7 मिट्टी के हांडे (बर्तन) रखकर पकाया जाता है
- ▸आश्चर्यजनक बात: सबसे ऊपर का बर्तन पहले पकता है, फिर क्रमशः नीचे का
- ▸ईंधन: केवल लकड़ी (गैस/बिजली नहीं)
3भोग के प्रकार
- ▸छप्पन भोग (56 भोग): विशेष अवसरों पर 56 प्रकार के व्यंजन
- ▸दैनिक भोग: सामान्य दिनों में भी अनेक व्यंजन — चावल, दाल, सब्जी, खीर, मिठाई
- ▸कोठ भोग: सूखा प्रसाद — लड्डू, खाजा आदि
4सामग्री नियम
- ▸केवल शाकाहारी सामग्री
- ▸प्याज-लहसुन वर्जित
- ▸घी, दूध, चावल प्रमुख
- ▸चावल विशेष किस्म का — 'उखुड़ा' (उबला चावल)
5महाप्रसाद की विशेषता
- ▸जगन्नाथ का प्रसाद 'महाप्रसाद' कहलाता है — सर्वोच्च पवित्र
- ▸स्कन्दपुराण: 'जगन्नाथ का महाप्रसाद खाने से जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति'
- ▸यहाँ जाति-भेद नहीं — सभी वर्ण एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं
- ▸प्रसाद को 'आनन्द बाजार' में बेचा जाता है — यह मंदिर का प्रसाद बाजार
6रहस्यमय बातें
- ▸कहा जाता है कि जितने भी लोग आएँ, प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता और न कभी बचता
- ▸मंदिर के ध्वज की दिशा हवा के विपरीत लहराती दिखती है
- ▸समुद्र की हवा दिन में मंदिर की ओर (सामान्य से विपरीत)
7दैनिक भोग का समय
- ▸गोपाल बल्लव भोग (प्रातःकाल)
- ▸शक्ल भोग (मध्याह्न)
- ▸धूप (दोपहर)
- ▸सन्ध्या धूप (सायंकाल)
- ▸बड़शिंगार (रात्रि)
ध्यान रखें: महाप्रसाद को अत्यन्त सम्मान से ग्रहण करें — भूमि पर न गिराएँ, जूठा न छोड़ें।





