विस्तृत उत्तर
रामेश्वरम (तमिलनाडु) का रामनाथस्वामी मंदिर चार धामों में से एक है। इसके 22 पवित्र कुंड (तीर्थ) अत्यन्त महत्वपूर्ण हैं।
22 कुंडों का विवरण
मंदिर परिसर में 22 पवित्र जल कुंड हैं जिनमें स्नान करने का विधान है। प्रत्येक कुंड का अपना नाम और विशेष महत्व है।
प्रमुख कुंड
- 1महालक्ष्मी तीर्थ, 2. सावित्री तीर्थ, 3. गायत्री तीर्थ, 4. सरस्वती तीर्थ, 5. सेतुमाधव तीर्थ, 6. शंख तीर्थ, 7. चक्र तीर्थ, 8. कुबेर तीर्थ... और अन्य।
धार्मिक महत्व
1पाप-मुक्ति
स्कन्दपुराण (सेतुमाहात्म्य): 22 कुंडों में स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है। प्रत्येक कुंड विभिन्न पापों/दोषों के निवारण से जुड़ा है।
2रामायण सम्बंध
मान्यता: भगवान राम ने लंका विजय के बाद ब्रह्महत्या दोष (रावण ब्राह्मण था) के प्रायश्चित्त के लिए यहाँ शिवलिंग की स्थापना की और विभिन्न तीर्थों का जल मँगवाकर कुंड बनाए।
3प्रत्येक कुंड का जल — भिन्न स्वाद
आश्चर्यजनक बात: सभी 22 कुंड एक ही परिसर में हैं, फिर भी प्रत्येक का जल भिन्न स्वाद का है — कुछ मीठा, कुछ खारा, कुछ कड़वा। इसका वैज्ञानिक कारण — भिन्न भूजल स्रोत और खनिज सामग्री।
स्नान विधि
- ▸22 कुंडों में क्रमानुसार स्नान
- ▸प्रत्येक कुंड पर संकल्प और मंत्र जप
- ▸मंदिर के पुजारी कुंड का जल बाल्टी से भक्तों पर डालते हैं
- ▸सम्पूर्ण 22 कुंडों का स्नान = सर्वपाप क्षय
4चिकित्सीय मान्यता
कुछ कुंडों के जल में औषधीय गुण माने जाते हैं — चर्म रोग, जोड़ों का दर्द आदि में लाभ की लोक मान्यता।
5चार धाम यात्रा में
रामेश्वरम यात्रा में 22 कुंडों का स्नान अनिवार्य माना जाता है। इसके बिना यात्रा अपूर्ण।
सावधानी
कुंड का जल अत्यन्त ठंडा होता है — हृदय रोगी और वृद्ध व्यक्ति सावधानी बरतें। कुंडों के पास फिसलन हो सकती है।





