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जन्माष्टमी पर मध्यरात्रि में पूजा क्यों करते हैं?

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मध्यरात्रि पूजा क्योंकि: कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि (भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, रोहिणी) में हुआ (भागवत 10.3)। अभिजित मुहूर्त। जागरण तप। अंधकार (अज्ञान) में प्रकाश (कृष्ण) का उदय — अवतार का मूल सन्देश।

  1. 1जन्म तिथि-काल: जिस ठीक समय भगवान प्रकट हुए, उसी समय उनका स्मरण और पूजन — यह सबसे प्रमाणिक कारण है। मध्यरात्रि = प्रकटोत्सव का क्षण।
  2. 2अभिजित मुहूर्त: मध्यरात्रि के आसपास 'अभिजित मुहूर्त' होता है जो अत्यंत शुभ माना जाता है। कृष्ण जन्म इसी मुहूर्त में हुआ।
  3. 3जागरण का पुण्य: मध्यरात्रि तक जागकर भगवान का स्मरण = जागरण तप। यह एकादशी जागरण के समान पुण्यदायी माना गया है।
  4. 4अंधकार से प्रकाश: मध्यरात्रि = अज्ञान/अंधकार का चरम। भगवान का जन्म = ज्ञान/प्रकाश का उदय। सबसे गहन अंधकार में प्रकाश प्रकट होना — यही कृष्णावतार का सन्देश है।
  5. 5कंस का भय: कंस ने कारागार में रात्रि में कड़ी पहरेदारी रखी थी। भगवान ने इसी कठिनतम समय में प्रकट होकर दिखाया कि ईश्वरीय शक्ति के आगे कोई बाधा नहीं टिकती।
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